Kuntī–Sūrya-saṃvāda: Autonomy, Reputation, and the Promise of Karṇa
विनिकृत्तभुजस्कन्धं कबन्धं भीमदर्शनम् | त॑ हत्वा सूतमप्यस्त्रर्णघान बलिनां वर:,भुजाओं और कंधोंके कट जानेसे उसका धड़ बड़ा भयंकर दिखायी देता था। इन्द्रजित्को मारकर बलवानोंमें श्रेष्ठ लक्ष्मणने अपने अस्त्रोंद्वारा उसके सारथिको भी मार गिराया
मार्कण्डेय उवाच