Āraṇyaka-parva Adhyāya 277 — Sāvitrī-Upākhyāna: Aśvapati’s Vows and Sāvitrī’s Birth; Search for a Suitable Husband Begins
ब्रह्मोवाच न स देवासुरै: शक््यो युद्धे जेतुं विभावसो । विहितं तत्र यत् कार्यमभितस्तस्य निग्रह:,ब्रह्माजीने कहा--अग्ने! देवता या असुर उसे युद्धमें नहीं जीत सकते। उसके विनाशके लिये जो आवश्यक कार्य था, वह कर दिया गया। अब सब प्रकारसे उस दुष्टका दमन हो जायगा
मार्कण्डेय उवाच