कुम्भकर्णवधः — Kumbhakarṇa’s Fall and the Renewal of the Engagement
तेषां ध्वजाग्राण्यभिवी क्ष्य राजा स्वयं दुरात्मा नरपुज्गवानाम् | जयद्रथो याज्ञसेनीमुवाच रथे स्थितां भानुमतीं हतौजा:,उन नरश्रेष्ठ वीरोंकी ध्वजाओंके अग्रभागोंको देखकर हतोत्साह हुए दुरात्मा राजा जयद्रथने अपने रथपर बैठी हुई तेजस्विनी द्रौपदीसे स्वयं कहा--
वैशम्पायन उवाच