रामस्य पम्पातीरगमनम्, सुग्रीवसख्यं, वालिवधः, सीतारक्षणवृत्तान्तश्च
Rāma at Pampā; alliance with Sugrīva; Vālin’s fall; Sītā’s guarded captivity
सर्वाध्यक्ष पराध्यक्ष त्वामहं शरणं गता । पाहि मां कृपया देव शरणागतवत्सल,“सबके वरण करने योग्य वरदाता अनन्त! आओ। जिन्हें तुम्हारे सिवा दूसरा कोई सहायता देनेवाला नहीं है, उन असहाय भक्तोंकी सहायता करो। पुराणपुरुष! प्राण और मनकी वृत्ति आदि तुम्हारे पासतक नहीं पहुँच सकती। सबके साक्षी परमात्मन्! मैं तुम्हारी शरणमें आयी हूँ। शरणागतवत्सल देव! कृपा करके मुझे बचाओ'
sarvādhyakṣa parādhyakṣa tvām ahaṃ śaraṇaṃ gatā | pāhi māṃ kṛpayā deva śaraṇāgatavatsala ||
“O Overseer of all, O Supreme Lord, I have come to You for refuge. Protect me, O God—You who are tender toward those who seek shelter—save me by Your compassion.”
वैशम्पायन उवाच