Adhyāya 227: Duryodhana’s Deliberation and the Ghoṣa-yātrā Pretext
Dvaita-vana
विश्वामित्रस्तु कृत्वेष्टिं सप्तर्षीणां महामुनि:,महामुनि विश्वामित्र जब सप्तर्षियोंकी इष्टि पूर्ण कर चुके, तब वे भी कामपीड़ित अग्निके पीछे-पीछे गुप्तरूपसे चल दिये थे, उस समय कोई उन्हें देख नहीं पाता था। अतः उन्होंने यह सारा वृत्तान्त यथार्थरूपसे जान लिया
मार्कण्डेय उवाच