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Shloka 23

द्रौपदी–सत्यभामा संवादः

Draupadī and Satyabhāmā on ethical household conduct

इमानन्यान्‌ समसृजत्‌ पावकान्‌ प्रथितान्‌ भुवि । अन्निहोत्रस्य दुष्टस्य प्रायश्षित्तार्थमुल्वणान्‌,मनुने अग्निहोत्र कर्ममें की हुई त्रुटिके प्रायश्चित्त [समाधान)-के लिये इन लोकविख्यात तेजस्वी अग्नियोंकी सृष्टि की, जो पूर्वोक्त अग्नियोंसे भिन्न हैं

मार्कण्डेय उवाच