वैशम्पायन उवाच श्रुत्वा तु वचनं तस्य मार्कण्डेयस्य धीमत:ः,वैशम्पायनजी कहते हैं--राजन्! उन परम बुद्धिमान् मार्कण्डेयजीका वचन सुनकर भगवान् श्रीकृष्णसहित पाँचों पाण्डव बड़े प्रसन्न हुए। साथ ही जो श्रेष्ठ ब्राह्मण वहाँ पधारे थे, उन सबको भी बड़ी प्रसन्नता हुई
वैशम्पायन उवाच