इन्द्रद्युम्नोपाख्यानम्
Indradyumna Upākhyāna: On Kīrti, Smṛti, and Restoration
युधिष्ठिर उवाच आश्चर्यभूतं भवतः श्रुतं नो वदतां वर । मुने भार्गव यद् वृत्तं युगादौ प्रभवात्ययम्,युधिष्ठिर बोले--वक्ताओंमें श्रेष्ठ! भूगुवंशविभूषण महर्षे! हमने आपके मुखसे युगके आदिमें संघटित हुई उत्पत्ति और प्रलयके सम्बन्धमें बड़े आश्वर्यकी बातें सुनी हैं
युधिष्ठिर उवाच