Yugapramāṇa–Kaliyuga-lakṣaṇa–Pralaya-kathā
Markandeya’s Account of Yugas, Kali Signs, and Dissolution
विवदन्तौ तथा तौ तु मुनीनां दर्शने स्थितौ । ये तस्य यज्ञे संवृत्तास्तेडपृच्छन्त कथं त्विमौ,मुनियोंके सामने खड़े होकर जब वे दोनों इस प्रकार विवाद कर रहे थे, उस समय उन्हें देखकर जिनका यज्ञमें पहलेसे वरण हो चुका था, वे ब्राह्मण पूछने लगे--'ये दोनों कैसे लड़ रहे हैं?
गौतम उवाच