Karma, Preta-gati, and the Continuity of Phala
Mārkaṇḍeya’s Instruction
युधिछिर उवाच जातिरत्र महासर्प मनुष्यत्वे महामते | संकरात् सर्ववर्णानां दुष्परीक्ष्येति मे मति:,युधिष्ठिरने कहा--महासर्प! महामते! मनुष्योंमें जातिकी परीक्षा करना बहुत ही कठिन है; क्योंकि इस समय सभी वर्णोका परस्पर संकर (सम्मिश्रण) हो रहा है, ऐसा मेरा विचार है
युधिछिर उवाच