निवातकवचैः सह अर्जुनस्य रथयुद्धम्
Arjuna’s chariot engagement with the Nivātakavacas
पार्थानभ्याजगामाथ देवराज: पुरंदर: । थोड़ी ही देरमें हरे रंगके घोड़ोंसे जुते हुए, मेघ-गर्जनाके समान गम्भीर घोष करनेवाले, जाम्बूनद नामक सुवर्णसे अलंकृत रथपर आरूढ़ देवराज इन्द्र पाण्डवोंके पास आ पहुँचे। उस समय वे अपनी उत्कृष्ट प्रभासे अत्यन्त उद्धासित हो रहे थे
वैशम्पायन उवाच