अर्जुनस्य निवातकवचवधाय नियोगः
Arjuna’s commissioning for the Nivātakavacas
दृष्टवा विचित्राणि गिरी वनानि किरीटिनं चिन्तयतामभीक्ष्णम् । बभूव रात्रि्दिवसश्च तेषां संवत्सरेणैव समानरूप:,उस पर्वतपर विचित्र वन-कुंजोंकी शोभा देखते और निरन्तर अर्जुनका चिन्तन करते हुए पाण्डवोंको एक दिन-रातका समय एक वर्षके समान प्रतीत होता था
वैशम्पायन उवाच