ऋषीणां पूर्वचरितं तथा कर्म विचेष्टितम् । राजर्षीणां च चरितं कथाश्च विविधा: शुभा:,“हमने ऋषियोंके पूर्वचरित्र, कर्म और चेष्टाओंकी कथा सुनी है। राजर्षियोंके भी चरित्र और भाँति-भाँतिकी शुभ कथाएँ सुनते हुए मंगलमय आश्रमोंमें विशेषत: ब्राह्मणोंके साथ तीर्थस्नान किया है
वैशम्पायन उवाच