मज्जमानमनोटदृष्टि: फुल्लेषु गिरिसानुषु । द्रौोपदीवाक्यपाथेयो भीम: शीघ्रतरं ययौ,भीमसेनका मन और उनके नेत्र कुसुमोंसे अलंकृत पर्वतीय शिखरोंपर लगे थे। द्रौपदीका अनुरोधपूर्ण वचन ही उनके लिये पाथेय था और इस अवस्थामें वे अत्यन्त शीघ्रतापूर्वक चले जा रहे थे
वैशम्पायन उवाच