Kṛṣṇasya asāṃnidhya-kāraṇaṃ — Śālva–Soubha-vṛttāntaḥ
Why Kṛṣṇa was absent; the Śālva and Saubha account
प्रमत्तेष्वभिघातं हि कुर्याच्छाल्वो नराधिप: । इति कृत्वाप्रमत्तास्ते सर्वे वृष्ण्यन्धका: स्थिता:,क्योंकि मदिरासे उन्मत्त हुए लोगोंपर राजा शाल्व घातक प्रहार कर सकता है। यह सोचकर वृष्णि और अन्धकवंशके सभी योद्धा पूरी सावधानीके साथ युद्धमें डटे हुए थे
वायुदेव उवाच