रैभ्यो विद्वान् सहापत्यस्तपस्वी चेतरो5भवत् | तयाश्षाप्यतुला कीर्तिबल्यात् प्रभृति भारत,भारत! पुत्रोंसहित रैभ्य बड़े विद्वान थे, परंतु भरद्वाज केवल तपस्यामें संलग्न रहते थे। युधिष्ठिर! बाल्यावस्थासे ही इन दोनों महात्माओंकी अनुपम कीर्ति सब ओर फैल रही थी
लोमश उवाच