पुरुषस्याप्रमेयस्य सत्यस्थामिततेजस: । प्रजापतिपतेरविष्णोलॉकनाथस्य धीमत:,भगवान् श्रीकृष्ण अन्तर्यामी, अप्रमेय, सत्यस्वरूप, अमिततेजस्वी, प्रजापतियोंके भी पति, सम्पूर्ण लोकोंके रक्षक तथा परम बुद्धिमान श्रीविष्णु ही हैं (अर्जुनने उनकी इस प्रकार स्तुति की)
वैशग्पायन उवाच