Kāleya-Āśrama-Vināśaḥ — The Kāleyas’ nocturnal raids and the devas’ supplication to Nārāyaṇa
स वाच्य: सहितै: सर्वैर्भवद्धिर्जयकाड्क्षिभि: । स्वान्यस्थीनि प्रयच्छेति त्रैलोक्यस्य हिताय वै,“जब वे वर देना स्वीकार कर लें तब विजयकी अभिलाषा रखनेवाले तुम सब लोग उनसे एक साथ यों कहना--“महात्मन्! आप तीनों लोकोंके हितके लिये अपने शरीरकी हड्डियाँ प्रदान करें"
लोगमश उवाच