Gandhārī’s Lament for Bhūriśravas and Śakuni
Book 11, Chapter 24
कि नु वक्ष्यसि संसत्सु कथासु च जनार्दन । अर्जुनस्य महत् कर्म स्वयं वा स किरीटभूत्,“जनार्दन! तुम सत्पुरुषोंकी सभाओंमें, बातचीतके प्रसंगमें अर्जुनके महान् कर्मका किस तरह वर्णन करोगे? अथवा स्वयं किरीटधारी अर्जुन ही कैसे इस जघन्य कार्यकी चर्चा करेंगे?”
वैशम्पायन उवाच