Strī Parva, Adhyāya 2 — Vidura’s Consolation on Kāla, Karma, and the Limits of Lamentation (विदुरोपदेशः)
प्रज्ञया मानसं दु:खं हन्याच्छारीरमौषधै: । एतद् विज्ञानसामर्थ्य न बालै: समतामियात्,मनुष्यको चाहिये कि वह मानसिक दुः:खको बुद्धि एवं विचारद्वारा और शारीरिक कष्टको ओषधियोंद्वारा दूर करे, यही विज्ञानकी शक्ति है। उसे बालकोंके समान अविवेकपूर्ण बर्ताव नहीं करना चाहिये
विदुर उवाच