आयोधनदर्शनम्
Viewing the Battlefield of Kurukṣetra
अमूस्त्वभिसमागम्य स्मरन्त्यो भर्तृजान् गुणान् । पृथगेवाभ्यधावन्त्य: पुत्रान् भ्रातृून् पितृून् पतीन्,“वे अपने पतियोंके गुणोंका स्मरण करती हुई उनकी लाशोंके पास जा रही हैं और पतियों, भाइयों, पिताओं तथा पुत्रोंके शरीरोंकी ओर पृथक्-पृथक् दौड़ रही हैं
वैशम्पायन उवाच