रणभूमिवर्णनम् — Devāsuropama-yuddha and the ‘River’ Metaphor of the Battlefield
मद्रराजं पुरस्कृत्य तूर्णमभ्यद्रवन् परान् । “आज आचार्यपुत्र अश्वत्थामा शत्रुओंके साथ अकेले युद्ध न करें। हम सब लोगोंको एक साथ होकर एक-दूसरेकी रक्षा करते हुए युद्ध करना चाहिये। ऐसा नियम बनाकर वे सब महारथी मद्रराज शल्यको आगे करके तुरंत ही शत्रुओंपर टूट पड़े
संजय उवाच