प्रजानाथ! उसके उस आचरण, तपस्या तथा पराभक्तिसे भगवान् पाकशासन (इन्द्र) बड़े प्रसन्न हुए ।। आजगामाश्रमं तस्यास्त्रिदशाधिपति: प्रभु: । आस्थाय रूप विप्रर्षेवसिष्ठस्य महात्मन:,वे शक्तिशाली देवराज ब्रद्मर्षि महात्मा वसिष्ठका रूप धारण करके उसके आश्रमपर आये
वैशम्पायन उवाच