शकुनिवधः — Sahadeva’s Slaying of Śakuni
with Ulūka’s fall
तान् वै सर्वान् हनिष्यामि यद्यपि स्युर्न मानुषा: । “श्रीकृष्ण! मैं सोचता हूँ कि आज शत्रुदलका कोई भी योद्धा यहाँ मेरे हाथसे बचकर नहीं जा सकेगा। जो मदोन्मत्त वीर आज युद्ध छोड़कर भाग नहीं जायँगे, उन सबको, वे मनुष्य न होकर देवता या दैत्य ही क्यों न हों, मैं मार डालूँगा
संजय उवाच