Sauptika Parva, Adhyaya 8 — Dhṛṣṭadyumna-vadha and the Camp’s Nocturnal Rout
धृतराष्ट उवाच प्रागेव सुमहत् कर्म द्रौणिरेतन्महारथ: । नाकरोदीदृशं कस्मान्मत्पुत्रविजये धृत:,राजा धृतराष्ट्रने पूछा--संजय! अश्वत्थामा तो मेरे पुत्रको विजय दिलानेका दृढ़ निश्चय कर चुका था। फिर उस महारथी वीरने पहले ही ऐसा महान् पराक्रम क्यों नहीं किया?
धृतराष्ट उवाच