'सत्पुरुषोंमें श्रेष्ठ मामाजी! पाण्डव और पांचाल जब श्रीकृष्ण और अर्जुनसे सुरक्षित हों, उस दशामें मैं उन्हें देवराज इन्द्रके लिये भी अत्यन्त असहा एवं अजेय मानता हूँ ।। न चापि शक्तः संयन्तुं कोपमेतं समुत्थितम् | त॑ं न पश्यामि लोकेडस्मिन् यो मां कोपान्निवर्तयेत्
कृप उवाच