Adhyāya 3: Indra’s Invitation and Yudhiṣṭhira’s Refusal to Abandon the Dog
Svargārohaṇa Test
तैर्विना नोत्सहे वस्तुमिह दैत्यनिबर्हण । गन्तुमिच्छामि तत्राहं यत्र ते भ्रातरो गता:,'दैत्यसूदन! अपने भाइयोंके बिना मुझे यहाँ रहनेका उत्साह नहीं होता; अतः मैं वहीं जाना चाहता हूँ, जहाँ मेरे भाई गये हैं तथा जहाँ ऊँचे कदवाली, श्यामवर्णा, बुद्धिमती सत्त्वगुणसम्पन्ना एवं युवतियोंमें श्रेष्ठ मेरी द्रौपदी गयी है
वैशम्पायन उवाच