कर्णेन व्यूहविधानम् — Karṇa’s Battle Formation and the Pāṇḍava Counter-Plan
Adhyāya 31
तदिदं हतभूयिष्ठं बल॑ मम नराधिप । पूर्वमप्यल्पकै: पार्थर्हत॑ं किमुत साम्प्रतम्,“नरेश्वर! इस प्रकार मेरी इस सेनाका अधिकांश भाग नष्ट हो चुका है। पहले भी जब अपनी सारी सेना मौजूद थी, अल्पसंख्यक कुन्तीकुमारोंने कौरवसेनाका नाश कर दिया था। फिर इस समय तो कहना ही क्या है?
संजय उवाच