अध्याय २९: कर्णस्य शल्यं प्रति शापस्मरणं च युद्धनिश्चयः | Chapter 29: Karṇa recalls curses to Śalya and declares resolve for battle
हार्दिक्यस्य धनुश्शछित्त्वा ध्वजं चाश्वांस्तदावधीत् । दुःशासनस्येष्वसनं छित्त्वा राधेयम भ्ययात्,इसके बाद उन्होंने कृतवर्माका धनुष काटकर उसके ध्वज और घोड़ोंको भी तत्काल नष्ट कर दिया। फिर दुःशासनके धनुषके टुकड़े-टुकड़े करके राधापुत्र कर्णपर आक्रमण किया
संजय उवाच