शैनेयचरितम्
The Exploits of Śaineya/Sātyaki amid Encirclement
समुद्रमिव घर्मान्ते विशन् घोरो महानिल: । व्यक्षो भयदनीकानि पाण्डवानां द्विजोत्तम:,जैसे ग्रीष्म-ऋतुके अन्तमें बड़े जोरसे उठी हुई भयंकर वायु महासागरमें क्षोभ उत्पन्न करके वहाँ ज्वारका दृश्य उपस्थित कर देती है, उसी प्रकार विप्रवर द्रोणाचार्यने पाण्डव- सेनामें हलचल मचा दी
संजय उवाच