द्रोण–सात्यकि-युद्धम्
Droṇa–Sātyaki Engagement
अजुन उवाच गुरुर्भवान् न मे शत्रु: शिष्य: पुत्रसमो5स्मि ते । न चास्ति स पुमॉल्लोके यस्त्वां युधि पराजयेत्,अर्जुन बोले--ब्रह्मन! आप मेरे गुरु हैं। शत्रु नहीं हैं। मैं आपका पुत्रके समान प्रिय शिष्य हूँ। इस जगत्में ऐसा कोई पुरुष नहीं है, जो युद्धमें आपको पराजित कर सके
अजुन उवाच