द्रोणपर्व — अध्याय ८७: सात्यकेरनुयात्रा
Sātyaki’s resolve and departure to reach Arjuna
यमौ च पुरुषव्याप्रौ मन्त्री च मधुसूदन: । क एताज्जातु युध्येत लोके5स्मिन् वै जिजीविषु:,जिस पक्षमें भीमसेन, अर्जुन, वृष्णिवीर सात्यकि, पांचालवीर उत्तमौजा, दुर्जय युधामन्यु, दुर्धर्ष धृष्टद्युम्म, अपराजित वीर शिखण्डी, अश्मक, केकयराजकुमार, सोमकपुत्र क्षत्रधर्मा, चेदिराज धृष्टकेतु, चेकितान, काशिराजके पुत्र अभिभाू, द्रौपदीके पाँचों पुत्र, राजा विराट और महारथी ट्रुपद हैं, जहाँ पुरुषसिंह नकुल, सहदेव और मन्त्रदाता मधुसूदन हैं, वहाँ इस संसारमें कौन ऐसा वीर है, जो जीवित रहनेकी इच्छा रखकर इन वीरोंके साथ कभी युद्ध करेगा
yamau ca puruṣavyāghrau mantrī ca madhusūdanaḥ | ka etājjātu yudhyeta loke 'smin vai jijīviṣuḥ ||
Dhṛtarāṣṭra said: “And the twin brothers—those tiger-like men—together with Madhusūdana (Kṛṣṇa), the wise counsellor: who in this world, desiring to live, would ever choose to fight against such men?”
धृतराष्ट उवाच