Saumadatti-vadha and Bhīma–Alambusa-saṃyoga (सौमदत्तिवधः तथा भीमालम्बुससंयोगः)
तौ तज्जगृहतुः प्रीतौ धनुर्बाणं च सुप्रभम् । आजतद्नतुर्महात्मानौ ददतुश्न महात्मने,उस समय अत्यन्त प्रसन्न होकर महात्मा श्रीकृष्ण और अर्जुनने उस प्रकाशमान धनुष और बाणको हाथमें ले लिया। फिर वे उन्हें महादेवजीके पास ले आये और उन्हीं महात्माके हाथोंमें अर्पित कर दिया
संजय उवाच