Yudhiṣṭhira–Droṇa Saṃgrāma
Engagement and Countermeasures
स तुडूं शतशुड्ूं च शर्यातिवनमेव च । पुण्यमश्वशिर:स्थानं स्थानमाथर्वणस्य च,तदनन्तर क्रमशः: उच्चतम शतशुंग, शर्यातिवन, पवित्र अश्वशिर:स्थान, आथर्वण मुनिका स्थान और गिरिराज वृषदंशका अवलोकन करते हुए वे महा-मन्दराचलपर जा पहुँचे, जो अप्सराओंसे व्याप्त और किन्नरोंसे सुशोभित था
संजय उवाच