अध्याय ७१ — द्रोणव्यूहरक्षा तथा समकालीन द्वन्द्वयुद्धानि
Protection of Droṇa’s formation and parallel duels
विद्वांस: कर्मभि: पुण्यै: स्वर्गमीहन्ति नित्यश: । नतु स्वर्गादयं लोक: काम्यते स्वर्गवासिभि:,विद्वान् पुरुष पुण्यकर्मोद्वारा सदा स्वर्गलोकमें जानेकी इच्छा करते हैं; परंतु स्वर्गवासी पुरुष स्वर्गसे इस लोकमें आनेकी कामना नहीं करते हैं
व्यास उवाच