Droṇa-parva Adhyāya 29 — Arjuna’s defeat of Vṛṣaka–Acalā and the neutralization of Śakuni’s māyā
एका मूर्तिस्तपश्चर्या कुरुते मे भुवि स्थिता । अपरा पश्यति जगत् कुर्वाणं साध्वसाधुनी,“मेरी एक मूर्ति इस भूमण्डलपर (बदरिकाश्रममें नर-नारायणके रूपमें) स्थित हो तपश्चर्या करती है। दूसरी (परमात्मस्वरूपा) मूर्ति शुभाशुभकर्म करनेवाले जगत्को साक्षीरूपसे देखती रहती है
संजय उवाच