रथचिह्नवर्णनम् / Description of Chariot Standards and Allied Advances
भारद्वाजं तथानीके दृष्टवा शूरमवस्थितम् | के शूरा: संन्यवर्तन्त तन््ममाचक्ष्व संजय,जँभाई लेते हुए व्याप्र तथा मदकी धारा बहानेवाले गजराजकी भाँति पराक्रमी, युद्धमें प्राणोंका विसर्जन करनेके लिये उद्यत, कवच आदिसे सुसज्जित, विचित्र रीतिसे युद्ध करनेवाले, शत्रुओंका भय बढ़ानेवाले, कृतज्ञ, सत्यपरायण, दुर्योधनके हितैषी तथा शूरवीर, भरद्वाजनन्दन महाधनुर्धर पुरुषसिंह द्रोणाचार्यको युद्धमें डटा हुआ देख किन शूरवीरोंने लौटकर उनका सामना किया? संजय! यह वृत्तान्त मुझसे कहो
bhāradvājaṃ tathānīke dṛṣṭvā śūram avasthitam | ke śūrāḥ saṃnyavartanta tan mamācakṣva saṃjaya ||
Seeing Bharadvāja’s son, the heroic Droṇa, standing firm in the battle-array, (Dhṛtarāṣṭra asks:) “Which warriors turned back to confront him? Sañjaya, tell me this account.”
संजय उवाच