द्रोणविक्रमदर्शनम् / The Display of Droṇa’s Onslaught and the Debate on Pāṇḍava Regrouping
नानद्यमान: पर्जन्यो मिश्रवातो हिमात्यये । अश्मवर्षमिवावर्षत् परेषां भयमादधत्,जैसे हेमन्त-ऋतुके अन्तमें अत्यन्त गर्जना करता हुआ वायुयुक्त मेघ पत्थरोंकी वर्षा करता है, उसी प्रकार द्रोणाचार्य शत्रुओंको भयभीत करते हुए उनके ऊपर बाणोंकी वर्षा करते थे
संजय उवाच