सुखमेधन्ति कुपिते तस्मिन्नपि गुहागता: । यदि वे कुपित हो जाये तो देवता, असुर, गन्धर्व और राक्षस इस लोकमें अथवा पातालमें छिप जानेपर भी चैनसे नहीं रहने पाते हैं ।। ५१ $ ।। दक्षस्य यजमानस्य विधिवत् सम्भूतं पुरा,पहलेकी बात है, वे यज्ञपरायण दक्षपर कुपित हो गये थे। उस समय उन्होंने उनके विधिपूर्वक किये जानेवाले यज्ञको नष्ट कर दिया था। उन दिनों वे निर्दय हो गये थे और धनुषद्वारा बाण छोड़कर बड़े जोर-जोरसे गर्जना करने लगे थे
sukham edhanti kupite tasminn api guhāgatāḥ |
Vyāsa said: Even if they hide away in caves, when he is enraged they cannot remain at ease. The passage underscores how the wrath of a mighty being makes fear inescapable—no refuge, whether in this world or below, grants peace when destructive anger is unleashed.
व्यास उवाच