सूर्याचन्द्रमसोलोंके प्रकाशन्ते रुचश्व॒ या: । ता: केशसंज्ञितास्त्रयक्षे व्योमकेशस्तत: स्मृत:,लोकमें जो सूर्य और चन्द्रमाकी किरणें प्रकाशित होती हैं, वे भगवान् त्रिलोचनके केश कही गयी हैं। वे व्योम (आकाश)-में प्रकाशित होती हैं; इसलिये उनका नाम “व्योमकेश' है
व्यास उवाच