धृष्टद्युम्नस्तु तद् राजन् भारद्वाजशिरो5हरत् । तावकानां महेष्वास: प्रमुखे तत् समाक्षिपत्,इस प्रकार सब सैनिकोंने द्रोणाचार्यका मारा जाना अपनी आँखोंसे देखा। राजन! महाथनुर्धर धृष्टद्युम्नने द्रोणाचार्यका वह सिर उठा लिया और उसे आपके पुत्रोंके सामने फेंक दिया
संजय उवाच