क्षात्रधर्म पुरस्कृत्य त्वरिता द्रोणमभ्ययु: । राजा युधिष्ठिरसे इस प्रकार प्रेरित हो उन वीर महारथियोंने युद्धके लिये उद्यत होकर क्षत्रियधर्मको सामने रखते हुए बड़ी उतावलीके साथ द्रोणाचार्यपर आक्रमण किया ।। ६१ * पजञ्चालास्त्वेकतो द्रोणमभ्यघ्नन् निशितै: शरै:
संजय उवाच