अलायुधस्य भीमवधसंकल्पः
Alāyudha’s Resolve to Confront Bhīma
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ६ श्लोक मिलाकर कुल ६५ श्लोक हैं।) ऑपनआक्ात बा अर क्ाज एकोनपज्चाशर्दाधिकशततमो< ध्याय: श्रीकृष्णका युधिष्ठिससे विजयका समाचार सुनाना और युधिष्ठिरद्वारा श्रीकृष्णाकी स्तुति तथा अर्जुन, भीम एवं सात्यकिका अभिनन्दन संजय उवाच ततो राजानमभ्येत्य धर्मपुत्रं युधिष्ठिरम् । ववन्दे स प्रहृष्टात्मा हते पार्थेन सैन्धवे,संजय कहते हैं--राजन्! तदनन्तर अर्जुनद्वारा सिंधुराज जयद्रथके मारे जानेपर धर्मपुत्र राजा युधिष्ठिरके पास पहुँचकर भगवान् श्रीकृष्णने हर्षपूर्ण हृदयसे उन्हें प्रणाम किया और कहा--
sañjaya uvāca | tato rājānam abhyetya dharmaputraṁ yudhiṣṭhiram | vavande sa prahṛṣṭātmā hate pārthena saindhave ||
Sañjaya said: Then, approaching King Yudhiṣṭhira, the son of Dharma, he (Śrī Kṛṣṇa) bowed to him with a heart filled with joy, for the lord of Sindhu (Jayadratha) had been slain by Pārtha (Arjuna).
संजय उवाच