Somadatta–Sātyaki Engagement; Bhīma’s Interventions; Droṇa–Yudhiṣṭhira Astra Exchange
Book 7, Chapter 132
इह नो ग्लहमानानामद्य तावज्जयाजयौ । शकुनिकी बुद्धिमें जो जूआ खेलनेकी बात पैदा हुई थी, वह वास्तवमें आज इस रूपमें सफल हो रही है। उस दिन सभामें किसी पक्षकी जीत या हार नहीं हुई थी। आज यहाँ जो हमलोग प्राणोंकी बाजी लगाकर जूआ खेल रहे हैं, इसीमें वास्तविक हार-जीत होनेवाली है
द्रोण उवाच