Droṇa-parva Adhyāya 114 — Karṇa–Bhīmasena Missile Exchange, Disarmament, and Arjuna’s Intervention
यत्र सेनां समाश्रित्य भीतस्तिष्ठति पाण्डवात् । गुप्तो रथवरश्रेष्ठैद्रॉणिकर्णकृपादिभि:,'पाण्डुनन्दन अर्जुनसे भयभीत हो अपनी सेनाका आश्रय लेकर जयद्रथ जहाँ अश्व॒त्थामा, कर्ण और कृपाचार्य आदि श्रेष्ठ महारथियोंसे सुरक्षित होकर खड़ा है वहीं मुझे पहुँचना है
संजय उवाच