Adhyāya 113: Karṇa–Bhīma Śaravarṣa and the Battlefield Aftermath (कर्णभीमशरवर्षः)
जानीषे हि रणे द्रोणं रभसं श्रेष्ठमम्मतम् । प्रतिज्ञा चापि ते नित्यं श्रुता द्रोणस्य माधव,“माधव! तुम जानते ही हो कि रणक्षेत्रमें श्रेष्ठ पुरुषोंद्वारा सम्मानित आचार्य द्रोण कितने वेगशाली हैं। उन्होंने जो प्रतिज्ञा कर रखी है, उसे भी तुम प्रतिदिन सुनते ही होगे
संजय उवाच