भीष्मपर्व — अध्याय २: संजयस्य दिव्यदृष्टिप्रदानम् तथा निमित्तवर्णनम्
Granting Sañjaya Divine Sight and the Description of Omens
ज्वलितार्केन्दुनक्षत्र निर्विशेषदिनक्षपम् | अहोरात्र मया दृष्टं तद् भयाय भविष्यति,“मुझे दिन और रातका समय ऐसा दिखायी दिया है जिसमें सूर्य, चन्द्रमा और तारे जलते-से जान पड़ते थे। दिन और रातमें कोई विशेष अन्तर नहीं दिखायी देता था। यह लक्षण भय लानेवाला होगा
वैशम्पायन उवाच