Bhīṣma-parva Adhyāya 16 — Saṃjaya’s Boon, Bhīṣma’s Protection, and the Dawn Arraying of Armies
सृंजयाश्च महेष्वासा धृष्टद्युम्नपुरोगमा: । भीष्मजी चाँदीके बने हुए सुन्दर रथपर विराजमान थे। उनकी तालचिह्रित स्वर्णमयी ध्वजा आकाशमें फहरा रही थी। उस समय कौरवों, पाण्डवों तथा धृष्टद्युम्न आदि महाधनुर्धर सूंजयवंशियोंने उन्हें सफेद बादलोंमें छिपे हुए सूर्यदेवके समान देखा || २३ ६ || जृम्भमाणं महासिंहं दृष्टवा क्षुद्रमृगा यथा
संजय उवाच