Śākadvīpa–Pramāṇa–Varṇana
Measurements and Description of Śākadvīpa
श्रीमान् भवति राजन्य: सिद्धार्थ: साधुसम्मत: । आयुर्बलं च कीर्तिश्व तस्य तेजश्न वर्धते,भरतश्रेष्ठ जो राजा इस भूमिपर्वको मनोयोगपूर्वक सुनता है, वह श्रीसम्पन्न, सफलमनोरथ तथा श्रेष्ठ पुरुषोंद्वारा सम्मानित होता है और उसके बल, आयु, कीर्ति तथा तेजकी वृद्धि होती है
संजय उवाच