शिखण्डी समरामर्षी शूरश्च समितिज्जय: । यथाभवच्च स्त्री पूर्व पश्चात् पुंस्त्वं समागत:,राजन! तुम्हारी सेनामें जो यह ट्रुपदपुत्र महारथी शिखण्डी है, वह समरभूमिमें अमर्षशील, शौर्यसम्पन्न तथा युद्धविजयी है। वह पहले स्त्री था, फिर पुरुषभावको प्राप्त हुआ है
भीष्म उवाच